सारांश-
नई सदी का व्यक्ति आंतरिक संघर्ष और मानसिक तनाव से जूझ रहा है जिसे साहित्य में बखूबी दर्शाया गया है साहित्य में वृद्धो की उपेक्षा और उनके अकेलेपन को लेकर चिंता जनक की स्थिति का चित्रण और विकास की अंधी दौड़ में पर्यावरण के विकास को लेकर विनाश को लेकर साहित्य में चिंता और जागरूकता दिख रही है । पश्चिमी प्रभाव के कारण भौतिक सुख सुविधाओं की दौड़ बढी है, जिससे जीवन की सार्थकता का प्रश्न उठा है। संयुक्त परिवारों का टूटना, एकल परिवारों का उदय, साहित्य में महिलाओं को सशक्त और स्वतंत्र दिखाया जा रहा है, लेकिन साथ ही बदलते सामाजिक परिदृश्य में उनकी चुनौतियों को भी रेखांकित किया जा रहा है। प्रवासी भारतीयों द्वारा रचा जा रहा साहित्य और इंटरनेट सोशल मीडिया वह ब्लॉग के माध्यम से साहित्य का नया रूप सामने आया है। वैश्वीकरण और बाजारीकारण के कारण स्वार्थ परता बढी है, जिससे साहित्य में जीवन मूल्यों का ह्रास या प्रमुखता से हुआ है।
शब्द संकेत - भारतीय साहित्य, जीवन मूल्य , सांस्कृतिक चेतना, मानवीय संवेदना , जीवन मूल्य